सूर्यास्त
Feb 11 2023
कविता उस क्षण को कैप्चर करती है जब सूर्य अस्त होता है और अंधेरा छा जाता है, इसकी दैनिक पुनरावृत्ति के बावजूद इसकी नाजुकता और अल्पकालिक प्रकृति। अंधेरा यहां दो तरह से प्रकट होता है, दोनों दृष्टिगत (रात में) और लाक्षणिक रूप से (मन में)।
कविता उस क्षण को कैप्चर करती है जब सूर्य अस्त होता है और अंधेरा छा जाता है, इसकी दैनिक पुनरावृत्ति के बावजूद इसकी नाजुकता और अल्पकालिक प्रकृति। अंधेरा यहां दो तरह से प्रकट होता है, दोनों दृष्टिगत (रात में) और लाक्षणिक रूप से (मन में)। मैंने हमेशा सूर्यास्त की प्रशंसा की है और मैं जितना हो सके दुनिया भर में सूर्यास्त की तस्वीरें लेता हूं।
© डेविड मंजरी / 10 अक्टूबर, 2011
दूरी में गोधूलि की एक पट्टी , चाँद के जागते ही
सूरज ढल जाता है ; दुर्घटना में हृदय परिवर्तन हो रहा है, इसके और इसके बीच का अंतर : प्रेम की रूढ़ियों के बीच एक अशुभ असंगति । अंधेरा अब आ गया है, सभी प्रकाश, सभी धारणाओं को, मन को ढंकने वाली एक काली टोपी ।

![क्या एक लिंक्ड सूची है, वैसे भी? [भाग 1]](https://post.nghiatu.com/assets/images/m/max/724/1*Xokk6XOjWyIGCBujkJsCzQ.jpeg)



































