रोसेरियम
Apr 05 2023
कविता काले गुलाबों ने कामदेव के धनुष को कलंकित किया - लिपिस्टिक से सिले हुए होंठ - छिटपुट प्रयुक्त साँसें ठंडी हो गईं - कांटों से भरे शब्द कोई वजन नहीं रखते - फिर भी खोपड़ी को छेदते हैं सारांशित - माली का जीवन यह अंतिम परिच्छेद - कौन-और- के ऊपर रोसैरियम की ओर पट्टिका पर खुदा हुआ है चौंतीस वर्षों से अमुक-अमुक के जमींदार को समर्पित क्या यह काई से ढके कड़वे संगमरमर की मुस्कान बन जाए मैं इसे दिल से लगा लूंगा - मैं कुछ गुलाब की झाड़ियाँ लगाऊंगा उनकी प्रतीक्षा करो खिलना - उन्हें तराशना मैं उन्हें सिल दूँगा नया उद्देश्य एक पुष्पांजलि बनाना - मफल सोचा।
कविता
काले गुलाब ने कामदेव के धनुष को कलंकित कर दिया - होठों को सिल दिया
लिपस्टिक के साथ - बहुत कम इस्तेमाल किया
सांसें ठंडी हो गईं - कांटों से भरे शब्द
वजन कम न करें - फिर भी खोपड़ी को छेदें
सारांशित - माली का जीवन
यह अंतिम पैराग्राफ - खुदा हुआ
पट्टिका पर रोजेरियम की ओर
कौन-और-क्या के ऊपर
अमुक को समर्पित,
अमुक-अमुक का जमींदार
चौंतीस से अधिक वर्षों के लिए
क्या यह मुस्कान को कड़वा कर देना चाहिए
काई से ढका संगमरमर
मैं इसे दिल से लगाऊंगा - मैं पौधे लगाऊंगा
कुछ गुलाब की झाड़ियाँ
उनके खिलने की प्रतीक्षा करें - उन्हें तराशें
मैं उन्हें नया उद्देश्य सिलाई दूँगा
एक पुष्पांजलि का निर्माण - मफल विचार

![क्या एक लिंक्ड सूची है, वैसे भी? [भाग 1]](https://post.nghiatu.com/assets/images/m/max/724/1*Xokk6XOjWyIGCBujkJsCzQ.jpeg)



































