सुबह का गाना

Apr 16 2023
वह कौन सा गीत है जो भोर गाती है, कि अन्धकार के बिना शब्दों का ज्ञान होगा? साँझ के पार साँझ लाती है, आती है भोर के पंछियों का गायन। गाते-गाते, रात बहुत कटी है, आओ हम दिन के उदित होने में आनन्दित हों।

वह कौन सा गीत है जो भोर गाती है, कि अन्धकार के बिना शब्दों का ज्ञान होगा?

साँझ के पार साँझ लाती है, आती है भोर के पंछियों का गायन।

गाते-गाते, रात बहुत कटी है, आओ हम दिन के उदित होने में आनन्दित हों।

क्योंकि सूर्य ने हमें मार्ग दिखाने के लिये यह अद्भुत ज्योति दी है।

आइए हम अपनी आत्माओं को अज्ञात की महान नदी में नवीनीकृत करें।

वहाँ जीवन का जल सदा बहता है, परिवर्तन की बयार सदा बहती रहती है।

जैसे हवा सरकंडों के बीच गीत गाती है, वैसे ही हम नाचते हुए अँधेरे को दूर भगाते हैं।

पक्षी आधी रात के गीत सुबह के सूरज के लिए गा रहे हैं, जैसे हम छाया में खिलखिलाते हैं।

अस्तित्व में नृत्य करते हुए, अनंत को जन्म देने वाली छायाएं, अनंत...

--- मैट बुकानन

मंगल कुंभ

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